सिनेमा घर में दूर की सीट इसलिए चुनते है, ताकि हम पूरी स्क्रीन को एक बार में आंखों में समां सके, अक्सर दूर बजने वाले ढोल सुहाने सुनाई देते है, इरशाद कामिल की एक लाइन है , कुछ रिश्तों का नमक ही दूरी होता है, न मिलना भी बहुत ही जरूरी होता है,
ताज से कुछ दूरी पर ही है आगरा फोर्ट अगर ताज़ से कोई नाराज़गी है, और उसे बिना बताये दूर से दीदार करना हो तो ये जगह परफेक्ट है, बिलकुल वैसा ही जैसे आप आगरा गए हों और पेठा छोड़ गज़क लेकर घर लौट आये हो ?

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