पहाड़ो पर मंदिर की उपस्थिति तो केवल एक प्रतीक मात्र है, शहर में गाड़ियों के चीखते चिल्लाते हॉर्न से दूर पेड़ों पर चहचहाते पक्छियों के गूंज, पेड़ों पर बन्दरो की उछल कूद, गर्मी में जलाशयों से नमी लाती हवाएं, सर्दी में पत्तो से छनकर आती धूप, बारिश में झरनो का विशाल स्वरुप
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