युद्ध से कभी किसी को क्या मिला ?, नफ़रत से किसी को क्या मिला है?, मोहब्बत से किसी को क्या मिला ? सभी में हमने अपनों को खोया है, पर क्या कोई अपने हक़ के लिए भी न लड़े, सहता रहे ?, पर कब तक ? कब तक ? ताकतवर को भी तो अपनी ताकत दिखाने का मौका मिले, बहादुर भी अपनी बहादुरी छुपाकर कहाँ रखे,अपने हक़ के पराये के सामने अपनों को खड़ा किया है कचहरी में
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