राज्याभिषेक

राजा का चुनाव कभी किस्मत ने किया, तो कभी अपनी ताकत से वीरोने विजय हासिल की, लड़ाई कभी दुसरो से, तो कभी अपनों से, लड़ाई, झगडे का बड़ा रूप है, पर लड़ाई में बड़ापन है, लड़ाई में प्रतिस्पर्धा है, वो विरोधी के मज़ाक उड़ाने तक सीमित नहीं, लड़ाई में राजा के चुनने की छमता है राजा जिससे जनता को बहुत उम्मीदे होती है राजा जनता के लिए उस बाप की तरह होता है जिसके बच्चे को लगता है की उसके पापा अगर चाहे तो उसे पूरी दुकान दिला सकते है, बाप भी ये ग़लतफ़हमी बनाये रखना है, वो महँगाई,  ख़र्च, कटौती जैसे ऊलजलूल सवाल अपने बच्चे के मन मे नहीं डालता   

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