कलाकार कच्ची मिटटी से अपनी कलाकृति बनाता है, उसे निखारता है, कुछ अदभुत कलाकार ऐसे भी है जो कलाकार को निखारते है, शहर के क़रीब बसे गांव शहर बनने की कोशिश में होते है, जब बसते है शहर की गलतियों से सीखकर बसते है, ऐसे ही एक ग्रामीण शहर से गुजरते वक़्त नज़र एक बोर्ड पर पड़ी "पॉटर्स द स्टूडियो स्टूडियो ! होशंगाबाद जैसे छोटे शहर में स्टूडियो मतलब "फोटो स्टूडियो " ही होता है जहाँ बोर्ड तो दुल्हन का लगा होता है पर भीड़ पासपोर्ट साइज फोटो खिचवाने के लिए बेरोजगारों की होती है,
दूसरे दिन तय समय १० : ३० पर स्टूडियो पहुँचा, सामने दो कलाकार बैठे थे एक की बनायीं हुई कलाकृतियाँ चारो तरफ सजी थी और दूसरे ने उस कलाकार को बनाया था

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