मेरी चाहत ❤

मैं तेरे चेहरे को पढ़ना चाहती हूँ किताब की तरह... 

तेरे साथ बीते हुए हर लम्हे को पिरोना चाहती हूँ ख्वाब की तरह... 

मैं जानती हूँ नहीं मिल सकती हूँ तुमको हर रोज... 

इसलिए ख्वाबो में आके गले लगाना चाहती हूँ मीठे एहसास की तरह... 

गले मिलती हूँ जब मैं तो आंखें मेरी नम हो जाती है 

भीगी हुई पलकों से लिपटकर रोना चाहती हूँ तेरी याद की तरह... 

चंद पल जब रह जाते है सवेरा होने में...जी भर के रोना चाहती हूँ 

एक बार गले लग लेना चाहती हूँ इस रात के ख़ूबसूरत एहसास की तरह... 


निधि यादव 



                          

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