January 18, 2018 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps सर्दियों की ठंडी में, आग के अँगारे की ललक, उस दिन भी लकड़ियां समेटने में आधी रात बीत गयी थी, फूँकते फूँकते साँसे भर गयी थी, धुँए से पूरी गली भर गयी थी. Comments
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