सर्दियों की ठंडी में, आग के अँगारे की ललक, उस दिन भी लकड़ियां समेटने में आधी रात बीत गयी थी, फूँकते फूँकते साँसे भर गयी थी, धुँए से पूरी गली भर गयी थी.

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