तेरे लिए क्या लूं ?
मैं - माजा
माज़ा का पहला घूँट जब गले का रास्ता तय कर ही रहा था की दिमाग गाओं का रास्ता तय कर पर बाड़े में लगे आम के पौधे तक पहुंच गया, पर जल्द ही बापस आ गया, उंगलियां टेबल पर दौड़ पड़ी और मोबाइल उठा लायी।
मैं- मां मेरा आम का पौधा कैसा है ?, आपने पानी डाला की नई, गर्मी बहुत पढ़ रही है
माँ- बेटा पिछले कुछ दिनों से मेरी तबियत ख़राब हे तुझे बताया नहीं, सोचा परेशान होगा, बगीचे तक तो कबसे नई गयी , पौधा सूख गया होगा, गर्मी बहुत है, तू तो ठीक है ना, जूस पी लिया कर, पैसो की चिंता मत किया कर, ख़त्म हो जाये तो और ले जाना।
सुमित गौर
बातूनी। कैन्टीन

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