पछतावा

                                 


कैन्टीन की बॉउंड्री पर लगे पौधे में एक गुलाब खिला था, चाय की चुस्की लेकर अपना मग रखकर कुर्सी से उठा.
गुलाब को पास से देखने की आस में, अपनी उंगलियो से सराहा, की पंखुडिया बिखर गयी.........अब था, तो बस पछतावा, बापस गया, चेयर से चाय का मग उठाया
अब चाय में भी वो स्वाद न था।

सुमित गौर 
बातूनी ! कैन्टीन 



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