बड़ी चिंता थी सोने की, सोने के पहले, उठने के बाद | सुबह शाम तिजोरी खोलूं, सोने का हिसाब करू ।
सोने की चोरी की खबर से, कुर्सी पर सोना छूट गया | ऑफिस से घर, घर से ऑफिस, अब सीधे आना छूट गया |
ना जाने कौन ताला तोड़कर, आज कोई, और सोना रख गया।
मेरे सोने के गहनों को, अपने सोने से ढक गया।
मेरे सोने के गहनों को, अपने सोने से ढक गया।
सुमित गौर
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